Friday, January 21, 2011

विचार 1

कुएं में आजकल मेंडक नहीं,
मगरमच्छ दिखाई देते हैं।
कल सांझ खंडहरों के पास,
गिद्दों को कहते सुना था मैंने,
कुएं का पानी नमकीन हो रहा है।
उसका स्तर भी बढ़ रहा है।
यूँ ही नहीं विलाप की आवाज़ आती मुझे।
शायद अब कुछ दिन में,
आकाश साफ़ साफ़ नज़र आने लगे...

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DIALECT. left to time, it withered, like a dead corpse hung from wall, after the sentence. no poems to defend, no stories to tell, n...